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Puja in Ujjain

Kal Sarp Dosh Puja

कालसर्प एक ऐसा योग है जो जातक के पूर्व जन्म के किसी जघन्य अपराध के दंड या...read more

Mangal Dosh Puja

भगवान मंगल नाथ के रूप में स्वयं भगवान शिवजी उज्जैन में विराजमान है...read more

Navgrah Puja

नवग्रहों यानि नौ ग्रहों को शांत करने के लिए नवग्रह पूजन ही एकमात्र समाधान है...read more

Ark/Kumbh Vivah

पुरुष/कन्या के विवाह में आ रहे विलम्ब या अन्य दोषो को दूर करने के लिए...read more

Vastu Dosh

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर से परेशानियां खत्म नहीं हो रहीं है, पैसा टिक...read more

Pitr Dosh

पितृदोष के संबंध में ज्योतिष और पुराणों की अलग अलग धारणा है लेकिन...read more

Rudrabhishek

रुद्र भगवान शिव का एक प्रसिद्ध नाम है। रुद्राभिषेक में शिवलिंग को पवित्र...read more

Mahamrtunjay Jap

महामृत्युंजय मंत्र जपने से अकाल मृत्यु तो टलती ही है, आरोग्यता की भी...read more

Kal Sarp Dosh Puja

कालसर्प एक ऐसा योग है जो जातक के पूर्व जन्म के किसी जघन्य अपराध के दंड या...read more

Mangal Dosh Puja

भगवान मंगल नाथ के रूप में स्वयं भगवान शिवजी उज्जैन में विराजमान है...read more

Know More

कालसर्प दोष क्या है? और इस दोष को कालसर्प दोष क्यों कहा जाता है, शास्त्रों का अध्ययन करने पर हमने पाया राहू के अधिदेवता काल अर्थात यमराज है और प्रत्यधि देवता सर्प है, और जब कुंडली में बाकी के ग्रह राहु और केतु के मध्य आ जाते तो इस संदोष को ही कालसर्प दोष कहते है।
उज्जैन को समस्त तीर्थो में तिल भर महत्त्व अधिक मिला है और यह स्वयं महाकाल की नगरी है, इसलिए यहाँ पर समस्त प्रकार के सर्प दोष एवं काल सर्प दोष का निवारण संभव है,
सामन्यतया ग्रह घड़ी की विपरीत दिशा में चलते हैं वहीं राहु केतु घड़ी की दिशा में भ्रमण करते हैं। राहु केतु में एक अन्य विशेषता यह है कि दोनों एक दूसरे से सातवें घर में स्थित रहते हैं. दोनों के बीच 180 डिग्री की दूरी बनी रहती है, जैसा की हम जानते है की राहु और केतु स्वर्भानु दैत्य के अंश से बने है और दैत्य सदैव प्राणियों के लिए कष्टकारी ही रहे है तो राहु और केतु कैसे शुभ हो सकते है।
मंगल भात पूजा पूरी तरह से आपके जीवन से जुडी हुयी है इसलिए इस पूजा को विशिस्ट, सात्विक और विद्वान ब्राह्मण द्वारा गंभीरता पूर्वक करवानी चाहिए, पंडित कांता गुरु जी को इस पूजा का महत्त्व और विधि भली भांति से ज्ञात है और अभी तक इनके द्वारा की गयी पूजा गयी पूजा भगवान शिव की कृपा से सदैव सफल हुयी है।
पुरुषों के विवाह में आ रहे विलम्ब या अन्य दोषो को दूर करने के लिए किसी कन्या से विवाह से पूर्व उस पुरुष का विवाह सूर्य पुत्री जो की अर्क वृक्ष के रूप में विद्धमान है से करवा कर विवाह में आ रहे समस्त प्रकार के दोषो से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है, इसी विवाह पद्द्ति को अर्क विवाह कहा जाता है।
कन्या के विवाह में आ रहे विलम्ब या अन्य दोषो को दूर करने के लिए किसी पुरुष से विवाह से पूर्व उस कन्या का विवाह कुम्भ से करवाते है क्युकी कुम्ब में भगवान विष्णु विद्धमान है से करवा कर विवाह में आ रहे समस्त प्रकार के दोषो से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है, इसी विवाह पद्द्ति को कुंभ विवाह कहा जाता है।

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