क्या होता है रुद्राभिषेक और कैसे होती है इसकी पूजा समझिये ...?
Posted on : 10 Feb 2021
रुद्राभिषेक का तात्पर्य भगवान शिव का अभिषेक करना इसका अर्थ यह है की शिवलिंग पर रूद्र मंत्रों के द्वारा भगवान शिव का अभिषेक करना । शिव और शूद्र दोनों ही एक दूसरे के पर्यायवाची हैं। भगवान शिवशंकर को ही रूद्र कहा जाता है। क्योंकि कहा गया है की रुतम्-दु:खम्, द्रावयति-नाशयतीतिरुद्र: अर्थार्थ भोलेनाथ सभी दु:खों को ख़त्म कर देते हैं। हमारे सभी वेद पुराणों के अनुसार हमारे सभी दुखी होने के कारण हमारे पाप ही होते हैं, हमारे जीवन में किसी प्रकार की कोई परेशानी हो सुख दुःख हो या कोई मनोकामना हो तो सच्चे और पवित्र मन से रुद्राभिषेक पूजा करें इससे आपको निश्चित ही पूर्ण लाभ की प्राप्ति होगी ! रुद्राभिषेक करने से ग्रह से संबंधित दोषों और रोगों से भी निजात दिलाता है कहा करवाना चाहिए रुद्राभिषेक का पूजन -: * वह मंदिर जहां गर्भ ग्रह में शिवलिंग हो ऐसी जगह रुद्राभिषेक करना बहुत ही श्रेष्ठ माना जाता है * किसी ज्योतिर्लिंग पर जैसे उज्जैन में रुद्राभिषेक पूजा कर लिया तो ये बहुत ही लाभकारी है एवं यह श्रेष्ट बी होता है! * अपने आस पास के किसी मंदिर पर जाकर भी रुद्राभिषेक करना बहुत अच्छा होता है * अपने घर पर भी रुद्राभिषेक किया जा सकता है रुद्राभिषेक पूजा  करवाने के लाभ - आप जिस लक्ष्य के लिये रुद्राभिषेक पूजन करवा रहे है उसके लिये किस सामग्री का उपयोग करना चाहिए ,इसके बारे में शिवपुराण में बताया गया है -जल से अभिषेक करने पर वर्षा होती है - कुशा के जल से इस रुद्राभिषेक करने पर रोग और दुःख से छुटकारा मिलता है ! - अगर आप धन में भी बढ़ोतरी चाहते है तो जल में शहद डालकर रूद्र का अभिषेक करना चाहिए - गन्ने के रस से आप रुद्राभिषेक करोगे उससे लक्ष्मी की प्राप्ति और कर्ज से छुटकारा मिलता है - जल में अगर इत्र मिलाकर रुद्राभिषेक पूजन करने से सभी बीमारिया दूर होती है -मकान ,वाहन ,पशु की मनोकामना है तो दही से रुद्राभिषेक करना चाहिए -अगर आपको पुत्र प्रापति नहीं हो रही है तो गाय के दूध से रुद्राभिषेक करवाने पर पुत्र की प्राप्ति होती है - वंश में वृद्धि हेतु घी से भगवान का रुद्राभिषेक करना चाहिए है -मोक्ष की प्राप्ति हेतु भी तीर्थ के जल से रुद्राभिषेक करे -शक्कर मिलाकर दूध से रुद्राभिषेक पूजन करने पर बुद्धिमान होते है

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